बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव और नरेश यादव ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी साइबर क्राइम (Varanasi Cyber Crime) और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े एक चर्चित मामले में आरोपियों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। बहन की इंस्टाग्राम आईडी हैक कर भाई से पैसे ऐंठने और आईपीएल (IPL) मैचों में ऑनलाइन सट्टेबाजी करने के आरोप में जेल में बंद दो अभियुक्तों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली गई है। वाराणसी के जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कानपुर निवासी दोनों आरोपियों को सशर्त रिहा करने का आदेश दिया।
क्या था पूरा मामला? (इंस्टाग्राम हैकिंग और ठगी) = वाराणसी साइबर क्राइम (Varanasi Cyber Crime) थाने के उपनिरीक्षक आलोक कुमार यादव को 24 जून 2026 को प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से एक शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता शरद शारदा ने आरोप लगाया था कि उनकी बहन की इंस्टाग्राम आईडी से उनके पास एक क्यूआर कोड (QR Code) भेजा गया और 2,000 रुपये की मांग की गई। शरद ने समझा कि उनकी बहन को सच में पैसों की जरूरत है, इसलिए उन्होंने तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद जब दोबारा 3,000 रुपये की मांग की गई, तो शरद को कुछ शक हुआ। उन्होंने तुरंत अपनी बहन को फोन लगाया। बहन ने बताया कि उसने कोई पैसे नहीं मांगे हैं और उसकी इंस्टाग्राम आईडी हैक हो चुकी है। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने तत्काल वाराणसी साइबर क्राइम (Varanasi Cyber Crime) सेल में मामला दर्ज कराया।
दासनगर कॉलोनी में छापेमारी और सट्टा रैकेट का भंडाफोड़ = शिकायत मिलने के बाद वाराणसी साइबर क्राइम (Varanasi Cyber Crime) टीम और स्थानीय पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर मलदहिया स्थित दासनगर कॉलोनी के एक कमरे में छापेमारी की। वहां मौके से पुलिस ने दो युवकों को दबोचा, जिनकी पहचान दीपक सिंह और नवनीत सिंह (निवासी कानपुर) के रूप में हुई। तलाशी के दौरान कमरे से पुलिस को भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद हुए : कुल मोबाइल: 9 अदद सिम कार्ड: 12 अदद एटीएम कार्ड: 1 अदद।
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वे ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) का रैकेट चलाते हैं। उन्होंने बताया कि उनका एक दोस्त प्रवीण उर्फ अक्षय उनका बॉस है। वे इन मोबाइल और सिम कार्ड्स का इस्तेमाल अपनी सट्टेबाजी वेबसाइट का प्रचार करने, लोगों को सट्टे की आईडी बेचने और पैसे के डिपॉजिट व विड्रॉल को मॉनिटर करने के लिए करते थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था।
अदालत में बचाव पक्ष की दलील और जमानत = इस मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव और नरेश यादव ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को इस मामले में राहत दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद, जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने आरोपी दीपक सिंह और नवनीत सिंह को 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और इतनी ही धनराशि का बंधपत्र (Bail Bond) दाखिल करने पर जेल से रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
भले ही आरोपियों को कोर्ट से बेल मिल गई हो, लेकिन वाराणसी साइबर क्राइम (Varanasi Cyber Crime) से जुड़े इस हाई-टेक सट्टेबाजी नेटवर्क पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है।




