“विनोद खन्ना अक्सर रोते रहते थे। कहते थे कि उन्हें पत्नी व बच्चों की याद आ रही है। लेकिन ओशो को कुछ और ही शक था। ओशो को लगता था कि विनोद खन्ना जलते हैं। विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन की कामयाबी से जलते हैं। ” आचार्य रजनीश उर्फ़ ओशो के भाई शैलेंद्र सरस्वती ने ये बात अपने एक हालिया इंटरव्यू में कही है। ये इंटरव्यू शैलेंद्र सरस्वती ने गलाटा इंडिया को दिया है। शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि वो आश्रम में विनोद खन्ना के पास ही रहा करते थे। उन्होंने बहुत करीब से विनोद खन्ना को देखा है।

शैलेंद्र सरस्वती ने कहा,”मैं जानता हूं विनोद खन्ना किस चीज़ से गुज़र रहे थे। क्या बीत रही थी उन पर। लोगों को लगता है कि एक कामयाब व्यक्ति हर तरीके से कामयाब होता है। मगर ऐसा नहीं है। हो सकता है कि वो बहुत कुछ झेल रहा हो। और उस सबको सिर्फ़ वही जानता हो।” शैलेंद्र सरस्वती के अनुसार, विनोद खन्ना अक्सर रोते रहते थे। ओशो ने जब विनोद खन्ना सेे उनके रोने की वजह पूछी तो विनोद खन्ना ने कहा कि उन्हें अपनी पत्नी व बच्चों की याद आ रही है। लेकिन ओशो को शक था कि बात कुछ और है।

शैलेंद्र सरस्वती ने कहा कि ओशो को लगता था कि विनोद खन्ना को अमिताभ बच्चन की कामयाबी से जलन हो रही है। विनोद खन्ना के फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ने के बाद अमिताभ बच्चन कामयाबी की बेतहाशा ऊंचाईयों पर पहुंच गए थे। खूब नाम कमा रहे थे अमिताभ बच्चन तब। बकौल शैलेंद्र सरस्वती, ओशो ने विनोद खन्ना से कहा था कि तुम पत्नी और बच्चों को याद नहीं कर रहे हो। अमेरिका आने के बाद अमिताभ बच्चन सांसद बन गए। तुम अनजाने में अमिताभ बच्चन से जल रहे हो। और तुम्हें इस बात का अंदाज़ा ही नहीं है।

वैसे एक वक्त था साथियों जब अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना एक-दूजे के कॉम्पिटीटर माने जाते थे। वैसे तो अमिताभ और विनोद खन्ना ने भी साथ में कई फ़िल्मों में काम किया था। लेकिन उस दौर की कुछ रिपोर्ट्स में बताया जाता है कि प्रतिस्पर्धा तो इन दोनों सितारों के बीच थी। अपने उस इंटरव्यू में शैलेंद्र सरस्वती ने ये भी कहा कि ओशो ने विनोद खन्ना को सलाह दी कि वो विपक्षी पार्टी में शामिल हो जाएं। और अमिताभ बच्चन के खिलाफ चुनाव लड़ें। मगर ओशो की वो सलाह सुनकर विनोद खन्ना रो पड़े। उन्होंने ओशो से कहा कि उन्हें राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें बस अपनी फैमिली की याद आती है।

तब ओशो ने उनसे कहा कि ऐसा है ही नहीं। तुम ऊपरी तौर पर ये बातें कर रहे हो। मैं देख सकता हूं कि तुम अपना दर्द छिपा रहे हो। तुम्हारा सतही दिमाग तुम्हें बता रहा है कि तुम्हें तुम्हारे बच्चों की याद आ रही है। मगर तुम अमिताभ बच्चन से जल रहे हो। तुम्हें उनके खिलाफ़ लड़ना चाहिए।

शैलेंद्र सरस्वती ने उस इंटरव्यू में विनोद खन्ना के बारे में ये भी बताया कि जब विनोद खन्ना अमेरिका से वापस भारत लौटे तो उन्होंने अपने परिवार व बच्चों से संपर्क किया ही नहीं। उनके जीवन में कोई और महिला आ गई। उन्होंने उस महिला से शादी की और नया परिवार शुरू किया। जबकी अमेरिका में वो पत्नी व बच्चों की याद में रोने की बात कहते थे। शैलेंद्र सरस्वती ने ये भी बताया कि बाद में विनोद खन्ना ने स्वीकार किया था कि वो अपनी पत्नी व बच्चों से नहीं जुड़े थे। ओशो सही थे। हालांकि राजनीति में आने के बाद विनोद खन्ना ने ये भी कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें इससे भी कुछ हासिल हो पाएगा।

आपको बता दें कि साल 1975 के आखिरी महीने में अचानक विनोद खन्ना ने संन्यास लेने की घोषणा की थी। उस वक्त हर कोई हैरान रह गया था। पहले विनोद खन्ना ओशो के पास उनके पुणे वाले आश्रम में रहे। फिर जब ओशो अमेरिका चले गए तो विनोद खन्ना भी उनके पीछे-पीछे अमेरिका चले गए। ओशो से जुड़ने के बाद विनोद खन्ना ने अपने कई लग्ज़री सामान, महेंगे जूते व पकड़े लोगों को दान कर दिए थे। खुद विनोद खन्ना जी ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने ओशो के आश्रम में टॉयलेट तक साफ़ किए थे। बर्तन वगैरह भी खूब धोए थे।

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