वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने ली साइबर क्राइम सेल की समीक्षा बैठक, कहा- “साइबर अपराध आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है।”

वाराणसी: काशी अब साइबर अपराधियों के लिए आसान ठिकाना नहीं रहेगी! पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी के पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने आज (दिनांक 28.10.2025) साइबर क्राइम सेल की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की और कई अहम और सख्त दिशा-निर्देश दिए।

पुलिस आयुक्त ने साफ कहा, “साइबर अपराध आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सभी अधिकारी तकनीकी और समन्वित तरीके से काम करें, ताकि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।”

जनता के करोड़ों रुपये वापस – पुलिस कमिश्नर की सख्ती और मार्गदर्शन का असर दिखना शुरू हो गया है। साइबर सेल ने शानदार काम करते हुए ठगी के शिकार हुए लोगों को ₹2,15,46,638/- (दो करोड़ पंद्रह लाख छियालीस हज़ार छह सौ अड़तीस रुपये) की बड़ी रकम वापस कराई है। यह दिखाता है कि त्वरित कार्रवाई कितनी ज़रूरी है।

कार्रवाई का विवरणसंख्या
ब्लॉक किए गए संदिग्ध मोबाइल नंबर654
डिएक्टिवेट किए गए IMEI नंबर335
ग़िरफ्तार हुए साइबर ठग (06 फर्जी कॉल सेंटरों से)84 अभियुक्त
गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई03 गैंग

बैठक में पुलिस आयुक्त ने लंबित मामलों के जल्द निपटारे के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग अब डेटा और इंटेलिजेंस पर आधारित होनी चाहिए।

  • NCRP पोर्टल पर सख्ती: पुलिस कमिश्नर ने NCRP (National Cybercrime Reporting Portal) पर दर्ज हर शिकायत का समयबद्ध निस्तारण करने और इसके लिए थानावार जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
  • ‘प्रतिबिम्ब’ पोर्टल का उपयोग: पुलिस आयुक्त ने कहा कि ‘प्रतिबिम्ब पोर्टल’ का व्यापक उपयोग किया जाए। इसके डेटा से साइबर अपराध की प्रवृत्तियों और पैटर्न का विश्लेषण किया जाए, ताकि इंटेलिजेंस-बेस्ड पुलिसिंग की जा सके।
  • संदिग्ध ब्लॉकिंग: साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध मोबाइल/IMEI नंबरों को तत्काल ब्लॉक कराने के लिए एक समर्पित तकनीकी टीम बनाने का निर्देश दिया गया।
  • Mule Accounts पर निशाना: ‘म्यूल बैंक खातों’ (Mule Accounts) यानी अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले खातों की पहचान और वेरिफिकेशन को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया, ताकि असली ठगों तक पहुंचा जा सके।
  • PoS वेरिफिकेशन: फर्जी या संदेहास्पद PoS (Point of Sale) मशीनों की जानकारी मिलने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
  • जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार – सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता पर भी कमिश्नर ने जोर दिया। पिछले तीन महीनों में साइबर क्राइम सेल ने स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर 291 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 38,524 से अधिक लोगों को साइबर अपराधों से बचने के तरीके बताए गए।

कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और लगातार तकनीकी प्रशिक्षण पर ध्यान देने के निर्देश दिए। यह साफ़ है कि वाराणसी पुलिस साइबर अपराध की चुनौती को गंभीरता से लेते हुए आधुनिक तरीकों से इसका मुकाबला करने के लिए तैयार है।

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