वाराणसी के सारनाथ थाने से जुड़े मामले में अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को कोर्ट से मिली जमानत। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 25,000 के मुचलके पर रिहाई का दिया आदेश। पढ़ें पूरी खबर।

सुनवाई के दौरान अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता मयंक मिश्रा, विनय कुमार त्रिपाठी व अमित सिंह ने कोर्ट के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में कानूनी कार्यवाही के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को कोर्ट से मिली जमानत के बाद अब वह जेल से बाहर आ सकेंगे। यह मामला वाराणसी के सारनाथ थाने से जुड़ा है, जहाँ पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोपी का चालान किया था। मंगलवार, 07 अप्रैल 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-02 ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए रिहाई के आदेश जारी किए।

क्या था मामला और पुलिस की कार्रवाई? सारनाथ थाने की पुलिस ने मु.अ.सं.-178/2026 के तहत अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे 115(2), 352, 304(2), 324(4) और 317(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही अभिषेक पाण्डेय न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्ध थे।

बचाव पक्ष की दलीलें: “फर्जी बरामदगी का आरोप” सुनवाई के दौरान अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता मयंक मिश्रा, विनय कुमार त्रिपाठी व अमित सिंह ने कोर्ट के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि : पुलिस द्वारा दिखाई गई बरामदगी पूरी तरह से फर्जी और निराधार है। उनके मुवक्किल (अभिषेक पाण्डेय) ने कोई अपराध कारित नहीं किया है और वह बिल्कुल निर्दोष हैं। उन्हें केवल संदेह के आधार पर गलत तरीके से फंसाया गया है। इन दलीलों के साथ अधिवक्ता ने कोर्ट से अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर रिहा करने की प्रार्थना की।

न्यायालय का फैसला: 25,000 के मुचलके पर रिहाई न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-02 ने बचाव पक्ष और अभियोजन अधिकारी (Prosecution) की दलीलें सुनने के बाद पत्रावली का गहन अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि उक्त प्रकरण मजिस्ट्रेट ट्रायल के अंतर्गत आता है। अपराध की प्रकृति और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि अभियुक्त को जमानत देने का आधार पर्याप्त है।

अदालत का आदेश: “अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को 25,000/- रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की दो जमानतें (प्रतिभू) प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाए।”

इस मामले में अभियुक्त अभिषेक पाण्डेय को कोर्ट से मिली जमानत के बाद एक बार फिर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। बचाव पक्ष का सीधा आरोप है कि पुलिस ने कागजों में हेरफेर कर फर्जी बरामदगी दिखाई थी। फिलहाल, कोर्ट के इस आदेश से आरोपी पक्ष को बड़ी राहत मिली है।

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