जमानत अर्जी का विरोध वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने किया, जिसके बाद कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया।

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के धर्मनगरी में इन दिनों जालसाजों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन कानून के हाथ भी उतने ही लंबे हैं। वाराणसी में जमीन धोखाधड़ी कर ₹81 लाख की मोटी रकम हड़पने के एक बड़े मामले में आरोपितों को कोर्ट से करारा झटका लगा है। जिला जज (त्रयोदश) नीरज बख्शी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुशहा, चुनार (मिर्जापुर) निवासी दो सगे भाइयों—आरिफ अहमद उर्फ मोनू और मोहम्मद अहमद उर्फ मुजम्मिज की अग्रिम जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है।

अदालत में इन जालसाजों की जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने किया, जिसके बाद कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया।

क्या है वाराणसी में जमीन धोखाधड़ी का यह पूरा मामला? – वाराणसी में जमीन धोखाधड़ी के इस खेल का शिकार खुद एक अधिवक्ता बने हैं। प्रकरण के अनुसार, वादी मुकदमा अधिवक्ता रविशंकर पटेल ने इस जालसाजी को लेकर पुलिस कमिश्नर को एक प्रार्थना पत्र दिया था। पीड़ित का आरोप था कि मिर्जापुर के चुनार (कुशहा) निवासी आरिफ अहमद उर्फ मोनू, सकील, परवेज कादिर खान और आरिफ का भाई मोहम्मद अहमद (जो इस पूरी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड है) ने मिलकर उन्हें झांसे में लिया।

इन लोगों ने रविशंकर पटेल और उनके परिवार को वाराणसी के चितईपुर, विश्वकर्मा नगर कॉलोनी में स्थित आराजी नंबर 439/1 व 440/1 मौजा सुसुवाही (तहसील सदर) की जमीन दिखाई और उसे बेचने का सौदा तय किया।

अपनी जमीन बेची, मकान पर लोन लिया और दे दिए 81 लाख रुपये – जालसाजों के झांसे में आकर पीड़ित रविशंकर पटेल ने आरोपियों पर भरोसा कर लिया। उन्होंने जमीन खरीदने के लिए अपनी खुद की एक जमीन बेची और अपने मकान पर लोन भी लिया। पीड़ित ने कुल ₹14 लाख रुपये नकद और ₹67 लाख रुपये अपने ‘सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया’ (चितईपुर शाखा) के खाते से आरोपितों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल ₹81 लाख की भारी-भरकम रकम आरोपियों को दे दी गई।

धोखाधड़ी की पराकाष्ठा: पैसे ऐंठने के बाद आरिफ अहमद खान और उसके साथियों ने वह जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया और मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए उन्हें बेइज्जत किया।

वाराणसी में जमीन धोखाधड़ी का यह मामला सिर्फ पैसों की ठगी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद जो हुआ वह और भी चौंकाने वाला था। आरोपियों ने पीड़ित अधिवक्ता को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने पीड़ित से हर महीने ₹1 लाख रुपये की रंगदारी (फिरौती) मांगी। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर हर महीने एक लाख रुपये नहीं दिए, तो वे रविशंकर और उनके पूरे परिवार की हत्या कर देंगे।

पुलिस कमिश्नर के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा – इस जानलेवा धमकी और बड़ी ठगी के बाद पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस कमिश्नर के कड़े आदेश पर चितईपुर पुलिस ने दोनों सगे भाइयों समेत कुल चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और रंगदारी मांगने जैसी कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

इसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों भाइयों (आरिफ अहमद और मोहम्मद अहमद) ने कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। लेकिन वाराणसी में जमीन धोखाधड़ी के इस गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया और उन्हें कोई राहत नहीं दी।

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