वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में जनता की शिकायतों को लेकर लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ महकमा सख्त हो गया है। वाराणसी में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई और सुस्ती बरतने पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन करते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने चार दरोगाओं (उपनिरीक्षकों) को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया, जबकि दो अन्य दरोगाओं को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
तीनों जोन के थानों की हुई गहन समीक्षा = वाराणसी कमिश्नरेट में अपराधियों और कामचोरों पर नकेल कसने के लिए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल लगातार ग्राउंड रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने काशी, वरुणा और गोमती जोन के सभी थानों में साइबर अपराध नियंत्रण, तकनीकी जांच की स्थिति और आम जनता की शिकायतों के निस्तारण की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। इस बैठक के दौरान जब विभिन्न थानों के दरोगाओं की फाइलों को खंगाला गया, तो कई गंभीर लापरवाही और पेंडेंसी (लंबित मामले) सामने आई, जिसके बाद कमिश्नर का चाबुक चलना तय माना जा रहा था।
ये चार दरोगा किए गए लाइन हाजिर = समीक्षा बैठक में काम में ढिलाई और साइबर शिकायतों को गंभीरता से न लेने के आरोप में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने चार उपनिरीक्षकों को लाइन हाजिर करने का आदेश जारी किया। लाइन हाजिर होने वाले दरोगाओं में शामिल हैं : विजय कुमार यादव (कोतवाली थाना), सौरभ कुमार (आदमपुर थाना), पवन जायसवाल (शिवपुर थाना), तबीज खान (जंसा थाना)
60 दिनों से अधिक फाइलें दबाने पर दो हुए सस्पेंड = लाइन हाजिर करने के साथ ही पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने उन पुलिसकर्मियों पर और भी कठोर कार्रवाई की, जो महीनों से विवेचनाओं को लटकाए हुए थे। जांच के दौरान पाया गया कि 60 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी साइबर मामलों की विवेचनाएं ठंडे बस्ते में पड़ी थीं। इस घोर लापरवाही के आरोप में : सिंधौरा थाने में तैनात दरोगा रोहित कुमार को निलंबित कर दिया गया। लोहता थाने में तैनात दरोगा ऋतुराज मिश्रा को भी सस्पेंड कर दिया गया।
जन शिकायतों के प्रति संवेदनशील रहने की सख्त हिदायत = इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के बाद पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट के सभी पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। डिजिटल दौर में साइबर ठगी के शिकार होने वाले आम नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए तकनीकी जांच में तेजी लाई जाए।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जन शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसी लापरवाही मिलने पर इससे भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।




