वाराणसी (bmbreakingnews.com)। उत्तर प्रदेश की वाराणसी पुलिस ने अपराधियों और हत्यारों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन चक्रव्यूह” के तहत एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। काशी कमिश्नरेट की थाना रोहनियां पुलिस, सर्विलांस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कुछ दिन पहले हुए चर्चित जितेन्द्र कुमार हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है।
वाराणसी पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध हथियार, नकदी और भारी तादाद में साइबर ठगी के उपकरण बरामद करते हुए कुल 5 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो मुख्य शूटरों को पुलिस मुठभेड़ के बाद पैर में गोली लगने पर दबोचा गया। पुलिस कमिश्नर वाराणसी ने इस साहसिक और सफल अनावरण के लिए पुलिस टीम को 1,00,000 रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
क्या था जितेन्द्र कुमार हत्याकांड? = बीते 08 जून 2026 की रात को अवलेशपुर (थाना रोहनियां) के रहने वाले जितेन्द्र कुमार अपनी दुकान ‘लकी जनरल स्टोर’ को बंद करके घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बदमाशों ने उनकी गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। वादी मुकदमा विरेन्द्र कुमार की तहरीर पर रोहनियां थाने में हत्या का मुकदमा (मु०अ०सं० 0178/2026) दर्ज कर वाराणसी पुलिस जांच में जुटी थी।
हत्या की वजह: बैंक खाते में मौजूद 26 लाख रुपये = सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस सेल की मदद से जब वाराणसी पुलिस ने कड़ियां जोड़ीं, तो एक बेहद चौंकाने वाली कहानी सामने आई। गिरफ्तार अभियुक्त पेटीएम (Paytm) के फर्जी कर्मचारी बनकर दुकानदारों से साइबर ठगी करते थे।
करीब 6 महीने पहले इस गैंग का सदस्य गियांशू पटेल, मृतक जितेन्द्र कुमार की दुकान पर पेटीएम केवाईसी (KYC) करने के बहाने गया था। वहां उसने जितेन्द्र का मोबाइल चेक किया तो उसे पता चला कि जितेन्द्र के बैंक खाते में करीब 26 लाख रुपये जमा हैं। लालच में आकर गियांशू ने अपने साथियों के साथ मिलकर जितेन्द्र का मोबाइल फोन लूटने और उसके खाते से पैसे साफ करने की खौफनाक साजिश रच डाली।
घटना वाले दिन गियांशू और सुशील उर्फ गोलू रौनिन बाइक से रेकी कर रहे थे, जबकि उनके तीन अन्य साथी अमन सेठ, आयुष पटेल और मनीष सिंह हुंडई औरा कार से बैकअप दे रहे थे। रात में जब जितेन्द्र घर जाने लगे, तो मोबाइल छीनने की नीयत से बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। हालांकि, गोली लगने के बावजूद जितेन्द्र अपनी बाइक से सीधे घर पहुंच गए, जिससे उनका मोबाइल बदमाशों के हाथ नहीं लग सका और बदमाश बिना फोन लिए फरार हो गए। बाद में अस्पताल में जितेन्द्र की मौत हो गई।
आर्यन स्कूल के पास से 3 गिरफ्तार, फिर हुई पुलिस मुठभेड़ = वाराणसी पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर 28 जून 2026 की रात को आर्यन स्कूल अखरी के पास से तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया : आयुष पटेल उर्फ भोला (उम्र 21 वर्ष, निवासी मिर्जापुर), अमन सेठ (उम्र 22 वर्ष, निवासी मिर्जापुर), मनीष सिंह (उम्र 22 वर्ष, निवासी मिर्जापुर) इनकी निशानदेही पर जब पुलिस आगे बढ़ी, तो 29 जून 2026 की भोर में करीब 02:10 बजे एम०पी० मेमोरियल स्कूल करसड़ा के पास बाकी दो मुख्य अभियुक्तों के साथ पुलिस की सीधी मुठभेड़ हो गई। बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में वाराणसी पुलिस की आत्मरक्षार्थ गोलीबारी में दो मुख्य शूटर घायल हो गए और गिरफ्तार किए गए: 4. गियांशू पटेल उर्फ बाबू (उम्र 19 वर्ष, निवासी मिर्जापुर) 5. सुशील पटेल उर्फ गोलू (उम्र 20 वर्ष, निवासी मिर्जापुर) बदमाशों के खिलाफ रोहनियां थाने में मुठभेड़ और आर्म्स एक्ट के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया गया है।
साइबर ठगी का ऐसा साम्राज्य देख पुलिस भी हैरान (बरामदगी विवरण) = यह गैंग सिर्फ हत्यारा ही नहीं, बल्कि एक बड़ा अंतर्राज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह था, जो वाराणसी के अलावा लखनऊ, कानपुर और चंदौली में भी सक्रिय था। पुलिस ने इनके पास से जो सामान बरामद किया है, वह चौंकाने वाला है : नकद राशि: 1,78,000 रुपये नगद। हथियार: 1 अदद पिस्टल (7.65 बोर), 1 अदद तमंचा (.315 बोर), भारी मात्रा में खोखा व जिंदा कारतूस। इलेक्ट्रॉनिक्स व गैजेट्स: 1 एप्पल लैपटॉप, 18 एंड्रॉइड स्मार्टफोन, 2 की-पैड फोन, 10 अदद पेटीएम पेमेंट मशीन, 1 वाई-फाई डोंगल, 9 सिम कार्ड। बैंकिंग दस्तावेज: 29 अलग-अलग बैंकों के डेबिट कार्ड, 116 अदद फोन-पे व पेटीएम क्यूआर कोड, 15 प्लास्टिक क्यूआर कोड, 2 पासबुक, 3 चेकबुक और 1 पैन कार्ड। वाहन: घटना में प्रयुक्त रौनिन मोटरसाइकिल।
जितेन्द्र कुमार हत्याकांड के इस बेहद जटिल मामले का पर्दाफाश करने में थाना रोहनियां के प्रभारी निरीक्षक राजू सिंह व उनकी टीम, प्रभारी एसओजी उ०नि० गौरव कुमार सिंह व उनकी टीम, साइबर सेल प्रभारी उ०नि० कृष्ण कुमार जायसवाल और सर्विलांस सेल प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार की टीम ने अद्भुत समन्वय और जांबाजी का परिचय दिया है। आरोपियों को जेल भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।




