अभियुक्त के अधिवक्ता शिवांक त्रिपाठी व संतोष यादव ने अदालत में पक्ष रखा

वाराणसी। जिले के लालपुर पाण्डेयपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में अदालत से बड़ा फैसला आया है। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोर्ट संख्या-04, वाराणसी की अदालत ने सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया है, जिसके तहत कोर्ट से अभियुक्त मन्तोष उर्फ अखिलेश गुप्ता को मिली जमानत। यह मामला मुकदमा अपराध संख्या- 195/2024 से संबंधित है, जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 504, 506 और 325 के तहत थाना लालपुर पाण्डेयपुर में दर्ज किया गया था।

अदालत में आत्मसमर्पण और जमानत की अर्जी = मामले की प्रक्रिया के तहत अभियुक्त मन्तोष उर्फ अखिलेश गुप्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया और साथ ही जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त स्वयं न्यायालय में उपस्थित रहा। अभियुक्त के अधिवक्ताओ शिवांक त्रिपाठी व संतोष यादव ने पक्ष रखते हुए कहा कि उनका मुवक्किल पूरी तरह से निर्दोष है और उसने कोई भी कानून विरोधी काम नहीं किया है। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्त को उचित जमानत और मुचलके पर रिहा करने की गुहार लगाई गई।

अभियोजन का विरोध और कोर्ट का रुख = सुनवाई के दौरान सहायक अभियोजन अधिकारी ने आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि मामला गैर-जमानतीय प्रकृति का है, इसलिए जमानत अर्जी का विरोध किया गया। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पत्रावली का गहन परिशीलन किया। कोर्ट ने पाया कि मामले में आरोप पत्र (चार्जशीट) पहले ही प्रेषित की जा चुकी है और यह प्रकरण मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है। अपराध की प्रकृति, पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य और समस्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अदालत ने माना कि अभियुक्त को राहत देने का आधार पर्याप्त है।

25 हजार के बंधपत्र पर रिहाई का आदेश = सभी परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। इस आदेश के अनुसार कोर्ट से अभियुक्त मन्तोष उर्फ अखिलेश गुप्ता को मिली जमानत मंजूर कर ली गई।

अदालत ने आदेश दिया कि अभियुक्त मन्तोष उर्फ अखिलेश गुप्ता द्वारा 25,000 रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि का एक जमानतदार (प्रतिभू) प्रस्तुत करने पर उन्हें नियमानुसार जमानत पर रिहा कर दिया जाए। अदालत के इस फैसले से अभियुक्त पक्ष को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

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