आज मुम्बई की सड़कों पर से 17 साल बाद आई यह तस्वीर अंडरवर्ल्ड की दुनिया में फिर से खलबली मचाने के लिए काफ़ी है। 1980-90 के दशक में मुंबई में जब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का दबदबा हुआ करता था,उसके एक फ़ोन कॉल की आवाज पर बॉलीवुड के सेलिब्रिटी हो या,नेता, पुलिस अफ़सर हो उन सबकी पैंट गीली हो जाता था उस समय अरुण गवली ने दाऊद इब्राहिम को मुंबई छोड़ दुबई भागने पर मजबूर किया था।

1970-80 के दशक में अरुण गवली और रमा नाईक पक्के दोस्त थे और वो बाबू रेशम की बनी BRA गैंग में शामिल हो गए थे,ये वही गैंग था जो मुंबई में दाऊद के अवैध कारोबार को संभालता था। रमा नाईक का एक जमीनी विवाद के मामले को लेकर पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गया था,यह मुठभेड़ दाऊद के इशारे पर ही कराया गया था।
बस यही से अरुण गवली ने दाऊद इब्राहिम को अपने नजर पर चढ़ा लिए था और कहा थे कि स्वाभिमान और दोस्तों से बढ़कर कुछ भी नहीं,उसके बाद मुंबई के भयखाला के दगड़ी चाल में अपना प्रमुख ठिकाना बनाया। और उसके बाद मुंबई की सड़कों पर अरुण गवली की नाम के चर्चे होने लगे,और धीरे धीरे दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क के लिए चुनौती बनते गए। 1992 का वह दौर आया जब अरुण गवली और दाऊद इब्राहिम के बीच दुश्मनी के चर्चे खुलेआम होने लगे।
दरअसल दाऊद की बहन हसीना पारकर के पति इब्राहिम पारकर की हत्या अरुण गवली के ही गैंग ने कर दिया था,उसके बाद दाऊद ने अरुण गवली को अपना व्यक्तिगत दुश्मन माना। और इस व्यक्तित दुश्मनी के चलते दोनों के बिच खूब गैंगवार हुआ जिसमें सैंकड़ों लोगों की मौत हुआ। अंडरवर्ल्ड में यह कहावत आज भी है कि दाऊद इब्राहिम मुंबई में ही अपना ठिकाना बनाकर पूरा नेटवर्क चलाना चाहता था लेकिन अरुण गवली के डर से ही दुबई शिफ़्ट हो गया।
मुझे यह तस्वीरें देखने के बाद बाल ठाकरे का वह बयान फिर से याद आ गया जब उन्होंने कहा था कि ‘ अगर उनके पास दाऊद इब्राहिम है तो हमारे पास अरुण गवली हैं।’ यह शब्द काफ़ी थे अरुण गवली के रुतबे को बताने के लिए।



