वाराणसी के नक्खीघाट कांजी हाउस से बछड़ों के गायब होने के मामले में नया मोड़। गौरक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष ने लगाया आरोप- पशु तस्करी की शिकायत करना पड़ रहा भारी, मिल रही धमकी। डीएम और पुलिस कमिश्नर से सुरक्षा की मांग। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में पशु क्रूरता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। ताजा मामला नगर निगम के नक्खीघाट कांजी हाउस से जुड़ा है, जहां पशु तस्करी की शिकायत करना पड़ रहा भारी और शिकायतकर्ता को अब फर्जी मुकदमों और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां मिल रही हैं।

क्या है पूरा मामला? बीते दिनों वाराणसी नगर निगम क्षेत्र के नक्खीघाट स्थित कांजी हाउस से रहस्यमयी तरीके से बछड़ों को गायब किए जाने का मामला सामने आया था। राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अबू हुरैरा उर्फ जहीर बाबा और जनराज्य पार्टी के जिलाध्यक्ष ऋषि जायसवाल ने इस संदिग्ध गतिविधि के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने नगर आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर जांच की मांग की थी।

आरोप है कि जैसे ही इसकी जानकारी विपक्षियों और संबंधित कर्मचारियों को हुई, उन्होंने शिकायतकर्ता अबू हुरैरा को फर्जी मुकदमें में फंसाने की धमकी देना शुरू कर दिया।

अधिकारियों के संरक्षण में पशु तस्करी का आरोप? मंगलवार को जिलाधिकारी (DM) और पुलिस आयुक्त (CP) वाराणसी से मुलाकात कर अबू हुरैरा ने एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। इस पत्र में चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं :

  • निकासी का घटनाक्रम: आरोप है कि 12/13 अप्रैल 2026 की रात, नगर निगम के पशु सचल दस्ता वाहन से लगभग 7-8 बछड़ों को निकाला गया।
  • संलिप्तता: प्रार्थना पत्र के अनुसार, वाहन चालक सतीश कुमार, मुंशी कैलाश पाण्डेय और रात्रि कर्मचारी रमेश ने पशु चिकित्सक डॉ. संतोष पाल के इशारे पर इन बछड़ों को कांजी हाउस से बाहर निकाला।
  • साक्ष्य का दावा: शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके पास वाहन चालक के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य सुरक्षित हैं, जिसमें चालक ने स्वीकार किया है कि डॉ. संतोष पाल के कहने पर पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

“मुझे आशंका ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इन बेगुनाह पशुओं को सुनसान स्थान पर छोड़ने के बहाने पशु तस्करों के हवाले कर दिया गया है।” – अबू हुरैरा (शिकायतकर्ता)

शिकायतकर्ता ने बताया कि नगर आयुक्त को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं। हालांकि, मंगलवार को जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

वाराणसी में पशु तस्करी की शिकायत करना पड़ रहा भारी वाला यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और गौरक्षकों में इस बात को लेकर रोष है कि सरकारी तंत्र के भीतर बैठे लोग ही अगर रक्षक से भक्षक बन जाएंगे, तो बेजुबानों की रक्षा कौन करेगा?

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