अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव की अपील पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया है।
वाराणसी। चौक थाने में दर्ज एक चर्चित मामले में प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) समय पर दाखिल न करने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर से जुड़े इस मामले में अदालत ने चौक पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच की प्रगति आख्या अविलंब कोर्ट के समक्ष पेश की जाए। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अनुज यादव की अपील पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अगस्त की तिथि नियत की है।

8 महीने बीतने के बाद भी चार्जशीट दाखिल न होने पर सवाल = पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की ओर से उनके अधिवक्ता अनुज यादव ने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
अमिताभ ठाकुर की अर्जी में उठाया गया मुख्य सवाल:
“क्या कोई जांच एजेंसी, आपराधिक न्यायालय के बाध्यकारी क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने और एफआईआर दर्ज होने के 10 दिनों के भीतर आवेदक की न्यायिक हिरासत मांगने के बाद, बिना किसी वाजिब वजह के 6 महीने से अधिक समय तक जांच को लंबित रख सकती है?”
आवेदन में कहा गया है कि मामला दर्ज हुए 8 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है और उनकी गिरफ्तारी/न्यायिक हिरासत मांगे जाने के बावजूद चौक पुलिस अब तक इस जांच को कानूनी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा पाई है। कोर्ट में कोई उचित पुलिस रिपोर्ट (चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट) प्रस्तुत नहीं की गई है।
क्या है पूरा मामला? (बैकग्राउंड) = यह मामला बीते वर्ष 9 दिसंबर का है, जब वाराणसी के बड़ी पियरी निवासी हिन्दू युवा वाहिनी के नेता एवं वीडीए (VDA) के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला ने चौक थाने में तहरीर दी थी।
| विवरण | तथ्य |
| शिकायतकर्ता | अम्बरीष सिंह भोला (नेता, हिन्दू युवा वाहिनी) |
| आरोपी | पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, डॉ. नूतन ठाकुर व अन्य |
| दर्ज थाना | चौक थाना, वाराणसी |
| मुख्य आरोप | सोशल मीडिया पर मानहानिकारक वीडियो पोस्ट करना व भ्रामक खबरें फैलाना |
अम्बरीष सिंह भोला का आरोप था कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन पर आपराधिक मामलों में शामिल होने के झूठे आरोप लगाए गए थे। साथ ही, चर्चित कफ सिरप मामले में भी बिना किसी साक्ष्य के उनकी संलिप्तता दिखाकर उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया था। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने चौक थाने में आईपीसी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
कोर्ट के कड़े निर्देश से पुलिस महकमे में हलचल = अदालत द्वारा बार-बार समय दिए जाने के बाद भी चौक पुलिस की तरफ से आख्या (Report) जमा नहीं की गई, जिस पर न्यायाधीश ने नाराजगी जताई। अब 1 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि चौक पुलिस कोर्ट के समक्ष क्या जवाब दाखिल करती है और इस बहुचर्चित मामले में क्या नया मोड़ आता है।



