वादी (पीड़ित अधिवक्ता) की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव एवं विवेक शंकर तिवारी ने मजबूती से पक्ष रखते हुए अग्रिम जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया
वाराणसी (BM Breaking News): धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में वकीलों पर लगातार बढ़ते विवादों के बीच एक बड़ी अदालती खबर सामने आई है। अधिवक्ता पर जानलेवा हमले के आरोपी को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई के बाद सारनाथ क्षेत्र निवासी आरोपी परीक्षित सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
अदालत में सुनवाई के दौरान वादी (पीड़ित अधिवक्ता) की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव एवं विवेक शंकर तिवारी ने मजबूती से पक्ष रखते हुए अग्रिम जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए याचिका निरस्त करने का फैसला सुनाया।

क्या है पूरा मामला? जानिए घटना की पूरी सच्चाई = अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार, पूरी घटना सारनाथ थाना क्षेत्र की है। पीड़ित अधिवक्ता आलोक पाठक ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में बताया कि : घटना की तारीख व समय: 27 फरवरी 2026 को रात लगभग 10 बजे वह अपने पुराने मकान से सामान निकालकर नए मकान में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे थे।
गाली-गलौज और विवाद: उसी दौरान अकथा, पहाड़िया निवासी परीक्षित सिंह अपने चालक के साथ चार पहिया वाहन से वहां पहुंचा और गाड़ी रोक दी। आरोपी ने अधिवक्ता को देखते ही भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं और कहा कि “तुम वकीलों का मन बहुत बढ़ गया है।”
जान से मारने की नीयत से फायरिंग: जब अधिवक्ता ने इस व्यवहार का विरोध किया, तो परीक्षित सिंह अपनी गाड़ी घर खड़ी कर स्कूटी से चालक को भेजा। चालक ने मौके पर पहुंचकर धमकी दी कि “आज तुम्हारा मरना तय है।” इसके तुरंत बाद ही परीक्षित सिंह हाथ में असलहा (हथियार) लेकर अपनी पत्नी के साथ वहां पहुंच गया।
अधिवक्ता ने ऐसे बचाई अपनी जान: परीक्षित सिंह ने गालियां देते हुए पहले हवाई फायर किया और फिर दूसरा फायर सीधे अधिवक्ता आलोक पाठक को लक्ष्य करके जान से मारने की नीयत से कर दिया। गनीमत रही कि आलोक पाठक ने तुरंत झुककर पास खड़े टेम्पो की आड़ ले ली और अपनी जान बचाई। इसके बाद आरोपी, उसकी पत्नी और ड्राइवर जान से मारने की धमकियां देते हुए मौके से फरार हो गए।
पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट का कड़ा रुख = घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और वहां से कारतूस के खोखे बरामद किए। पीड़ित अधिवक्ता की तहरीर के आधार पर सारनाथ थाने में आरोपी परीक्षित सिंह, उसकी पत्नी और ड्राइवर के खिलाफ जानलेवा हमले (Attempt to Murder) समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी परीक्षित सिंह ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, अदालत में वादी पक्ष के वरिष्ठ वकीलों के तर्कों और पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर अपर जिला जज (प्रथम) ने अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।
BM Breaking News की नजर: वाराणसी में अधिवक्ताओं के सुरक्षा से जुड़े इस मामले में कोर्ट के इस सख्त रुख से कानून व्यवस्था पर आम जनता और वकीलों का भरोसा और मजबूत हुआ है।



