वाराणसी: कमिश्नरेट वाराणसी में सामाजिक समावेश और पुलिस संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की गई है। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के कुशल नेतृत्व, अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था एवं मुख्यालय कमिश्नरेट वाराणसी के मार्गदर्शन, तथा अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध नम्रिता श्रीवास्तवा के पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस आयुक्त कैण्ट प्रज्ञा पाठक के सहयोग से विश्व बधिर सप्ताह 2026 (World Deaf Week 2026) के अवसर पर वाराणसी पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language) पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को दिव्यांगजनों के प्रति अधिक संवेदनशील और सक्षम बनाना है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों या रोजमर्रा के पुलिस कार्यों में किसी भी प्रकार की संवादहीनता न रहे।

जागरूकता सत्र का मुख्य उद्देश्य और आवश्यकता = इस विशेष जागरूकता सत्र का मुख्य उद्देश्य बधिर एवं दिव्यांगजनों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करना, उनकी दैनिक व आपातकालीन आवश्यकताओं को गहराई से समझना तथा पुलिस एवं ट्रैफिक पुलिस द्वारा उन्हें आवश्यक सहयोग एवं सहायता प्रदान करने के संबंध में जागरूकता बढ़ाना था।

सत्र के दौरान उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने बधिर एवं दिव्यांगजनों के साथ संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीकों को बारीकी से समझा। इस पहल का मुख्य विजन पुलिस एवं ट्रैफिक पुलिस को बधिर एवं दिव्यांगजनों के साथ संवेदनशील, प्रभावी एवं समावेशी संवाद के लिए जागरूक एवं सक्षम बनाना तथा दिव्यांगजनों को बेहतर सहायता एवं सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में मजबूत योगदान देना है।

सी.आर.सी. वाराणसी की सक्रिय सहभागिता = इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC Varanasi) की टीम का सक्रिय योगदान रहा। आयोजित कार्यक्रम में सी.आर.सी. वाराणसी के निदेशक आशीष कुमार झा, प्रशासनिक अधिकारी अंशु शाही एवं लेखाकार दिनेश जायसवाल सहित पूरी सी.आर.सी. टीम की सक्रिय सहभागिता रही, जिनके मार्गदर्शन में पुलिस कर्मियों को सांकेतिक भाषा के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया।

वाराणसी पुलिस की समावेशी पहल का संदेश = वाराणसी पुलिस द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के हर वर्ग तक सुरक्षा और सहायता पहुंचाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस प्रकार के जागरूकता सत्रों से पुलिस कर्मियों में संवेदनशीलता बढ़ती है और वे दिव्यांगजनों की समस्याओं को अधिक त्वरित और प्रभावी ढंग से हल करने में सक्षम होते हैं।

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