गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की एक अदालत ने जघन्य अपराध के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। गाजीपुर में मासूम की हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। गहमर कोतवाली क्षेत्र के बारा गांव में करीब 5 साल पहले हुए इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड में जज शक्ति सिंह ने आरोपी मामा अमजद खान को मौत की सजा दी। फैसला सुनाने के बाद जज ने अपने पेन की निब भी तोड़ दी। पीड़ित पक्ष के वकील और एडीजीसी क्रिमिनल अखिलेश सिंह ने बताया कि गुरुवार को कोर्ट रूम में फैसला सुनाए जाने से पहले एक बेहद हैरान करने वाला वाकया हुआ।

जज के सामने खौफनाक जवाब: ‘कोई पछतावा नहीं’ अदालत की कार्यवाही के दौरान जब जज शक्ति सिंह ने हत्यारे मामा अमजद खान से पूछा— “अगर तुमको छोड़ दिया गया तो क्या करोगे?” तो दोषी अमजद खान ने बेहद क्रूरता से जवाब दिया— “अगर कोई मुझसे उलझेगा तो मैं उसकी भी हत्या कर दूंगा।”

अमजद का यह जवाब सुनकर जज भी हैरान रह गए। उन्होंने दोबारा पूछा— “तुम्हें तुम्हारे किए पर कोई पछतावा है?” दोषी ने बिना किसी डर के कहा— “बिल्कुल नहीं…”। इसके बाद अदालत ने गाजीपुर में मासूम की हत्या के दोषी को फांसी की सजा मुकर्रर करते हुए कहा कि इसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक इसकी मौत न हो जाए।

क्रूरता की हदें पार: सगी बहनों और भाई ने दी गवाही यह पूरा मामला 21 अक्टूबर 2021 का है। दिलदारनगर थाना क्षेत्र के मिर्चा गांव का रहने वाला 4 साल का मासूम दानियाल उर्फ अदनान खान अपनी मां शबाना नाज के साथ अपने ननिहाल बारा गांव आया था। वहाँ शबाना का अपने भाई अमजद खान से मामूली विवाद हो गया। इसी गुस्से में अमजद ने धारदार चाकू से अपने ही 4 साल के सगे भांजे का गला रेत दिया।

क्रूरता का आलम: पीड़ित पक्ष के वकील ने बताया कि मासूम दानियाल का सिर गर्दन से महज 4 इंच ही जुड़ा रह गया था। उसकी मां ने अपनी आंखों के सामने अपने भाई के हाथों बेटे को तड़पते देखा।

इस मामले में दानियाल के चाचा अरबाज खान ने गहमर थाने में धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट में चले मुकदमे के दौरान कुल 9 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें सबसे खास बात यह रही कि आरोपी अमजद खान की तीन सगी बहनों और एक भाई ने भी उसके खिलाफ कोर्ट में गवाही दी।

जज की भावुक टिप्पणी: ‘मां के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता’ फैसला सुनाते समय जज शक्ति सिंह ने कहा कि बच्चे की उम्र महज 4 साल थी, जो दुनिया की भलाई और बुराई के बारे में कुछ नहीं जानता था। इस हत्याकांड में क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। एक मां के सामने उसके ही बच्चे की हत्या कर दी गई, इस असहनीय दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

मामले से जुड़े मुख्य बिंदुविवरण
घटना की तारीख21 अक्टूबर 2021
मासूम पीड़ितदानियाल उर्फ अदनान (4 वर्ष)
मुख्य दोषीमामा अमजद खान (निवासी बारा गांव)
अदालत का फैसलागाजीपुर में मासूम की हत्या के दोषी को फांसी
कुल गवाह9 गवाह (3 सगी बहनें और 1 भाई शामिल)

अदालत के इस बड़े फैसले के बाद जब दानियाल के पिता अमजद से बात की गई, तो वह अपने इकलौते बेटे को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा, “दो बेटियों के बीच दानियाल मेरा इकलौता बेटा था। उसकी कमी दुनिया में कभी कोई पूरी नहीं कर सकता। उसकी याद आज भी मुझे हर पल तड़पाती है।” उन्होंने बताया कि दानियाल की मौत के बाद उनके घर एक और बेटे ने जन्म लिया जो अभी 2 साल का है, लेकिन वो अपने बड़े बेटे के जाने के गम को कभी भुला नहीं सकते।

सजा सुनाए जाने के बाद जब पुलिस अमजद खान को वापस जेल ले जा रही थी, तब भी उसके चेहरे पर कोई शिकन या पछतावा नहीं था। वह किसी शातिर अपराधी की तरह लोगों को घूरता रहा। आज गाजीपुर में मासूम की हत्या के दोषी को फांसी की सजा मिलने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *