इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय प्रणाली और अदालती आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर (विपक्षी संख्या-1) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने साफ किया है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला? – यह पूरा विवाद ‘परम हंस गुप्ता बनाम मोहित अग्रवाल व अन्य’ के तहत दायर एक अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता परम हंस गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह याचिका तब दायर की, जब कोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं किया गया।
दरअसल, इससे पहले 17 सितंबर 2025 को ‘रिट ए नंबर 18644/2024’ की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विपक्षियों द्वारा उन निर्देशों को पूरी तरह से हवा में उड़ा दिया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
कोर्ट में वकील ने क्या दी दलीलें? – सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने 17 सितंबर 2025 को कोर्ट द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया है। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष (प्रशासन) ने न तो तय समय सीमा के भीतर विभागीय कार्यवाही को पूरा किया और न ही 10 नवंबर 2024 को जारी किए गए निलंबन आदेश को रद्द किया। अधिवक्ता ने कोर्ट का ध्यान एक बड़े मुद्दे की ओर खींचते हुए कहा कि आदेशों का पालन न करना केवल इस एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि वाराणसी समेत अन्य जिलों में भी सरकारी अधिकारियों का यही ढर्रा बना हुआ है।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने जताई नाराजगी – मामले की गंभीरता और प्रशासनिक ढिलाई को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने सख्त रवैया अपनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि वाराणसी के पुलिस कमिश्नर 11 जून 2026 को दोपहर 02:00 बजे अपने स्पष्टीकरण के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हों।
कोर्ट का सख्त निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) को निर्देशित किया है कि वे इस आदेश की प्रति आज ही वाराणसी के पुलिस कमिश्नर तक पहुँचाएं। इसके साथ ही, रजिस्ट्रार (अनुपालन) को भी आदेश दिया गया है कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), वाराणसी के माध्यम से इस आदेश की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारी को तामील करवाएं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह सख्त आदेश प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा संदेश है कि अदालती आदेशों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि 11 जून को वाराणसी पुलिस कमिश्नर कोर्ट के सामने क्या स्पष्टीकरण पेश करते हैं।





